Friday, June 29, 2007

मेरी

खुशियोंसे ज़रा रंगोंसे ज़रा
हलकी नाज़ुक कलियोंसे भरा
सुबहका ओ सपना हो तुम्

रिहम रिहम गाते हुए उस पंछिकी तरह
जिगाक जिगाक कर उडती वह तितालिकी तरह
प्यारी मोहक सरिता हो तुम्

पर्बत कि उन् गहरी शिलाओंकी तरह
समुद्रमे खेलती उन् लेहरोंकी तरह
मेरे मॅन मे सदा बसी हो तुम्

हिमालैसे बहते उन् ज़रोनोंकी तरह
उन्न्पे पड़ती सुरज्की किर्नोंकी तरह
मेरे जीवन कि हर सांस हो तुम्

बरखा कि पहली फुह्हार कि तरह
कुहू, कोयल कि कुहक कि तरह
खुशियोंसे भरा संदेश हो तुम्

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